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Monday, April 8, 2013

कहाँ खो गया है आदमी ? (गीत)


कहाँ  खो  गया है आदमी ? (गीत)






http://www.youtube.com/watch?v=_oAJUyy9YFM&feature=youtu.be

http://mktvfilms.blogspot.in/2012/09/blog-post_7.html

अरमानों की  लाशें कितनी, ढो  रहा   है  आदमी..!

मायूसी के  भँवर में  कहाँ,  खो  गया  है  आदमी ?

अंतरा-१.

खिलखिलाता  मातम जहाँ, आँसू  बहाती  ख़ुशियाँ..!

मनचाही  सौगात पाकर  भी,  रो  रहा   है   आदमी ?

अरमानों   की   लाशें  कितनी, ढो  रहा   है  आदमी..!

अंतरा-२.

ज़िच राह भटकना  यहाँ,  नित जीना, नित  मरना  है..!

सादगी का  दम  भर  कर, चरम   सो  रहा  है  आदमी..!

अरमानों  की   लाशें      कितनी,  ढो  रहा   है  आदमी..!

(ज़िच  राह= लाचारी  भरी  ज़िंदगी; चरम= अंतिम )

अंतरा-३.

है  शग़ल  का  हाल  खस्ता, महँगा  पानी, खून  सस्ता ?

तभी  तो   आस्तीन,  इलीस   की   धो  रहा   है  आदमी..!

अरमानों  की      लाशें     कितनी,  ढो  रहा   है  आदमी..!

(शग़ल= रोजगारी; खस्ता=ख़राब) 

(इलीस की आस्तीन= शैतान की  लहूलुहान  बाँह)

अंतरा-४.

वसीयत लिखें  फ़ज़ीअत की  तो, क्या  लिखे  ये  आदमी ?

कवल  अवम, अंगी  को  देकर ,खुश  हो  रहा  है  आदमी..!

अरमानों   की    लाशें     कितनी,   ढो   रहा    है  आदमी..!

(फ़ज़ीअत= दुर्दशा ) (अवम= आख़री) (कवल= निवाला) (अंगी=नेताजी-सरकार)

© मार्कण्ड दवे । दिनांकः०७-०९-२०१२.

Friday, March 29, 2013

सरकती रात का आँचल । (गीत)







सरकती रात का आँचल । (गीत)


सरकती रात का, आँचल मैं  थामे  बैठा  हूँ ।

यारों   की  भीड़  में, तन्हाई  थामे  बैठा  हूँ ।


दिदारे यार  को, तरसता रहा, मैं भी, यार भी,

भरी  महफ़िल में  ये,रुसवाई  थामे  बैठा  हूँ ।


अंतरा-१.

आस थी इस शाम को,आयेंगे ना, आये वो..!!

बेवफ़ा, ग़मे  आशिकी,गले लगाए  बैठा  हूँ ।

भरी  महफ़िल में  ये,रुसवाई  थामे  बैठा  हूँ ।

सरकती  रात  का, आँचल  मैं थामे बैठा  हूँ ।

अंतरा-२.

प्यार में अक्सर, कहते थे  वो, मर जायेंगे ..!!

मैं  न  भूला,आज तक,जाँ  लूटाये  बैठा हूँ ।

भरी  महफ़िल में  ये,रुसवाई  थामे  बैठा  हूँ ।

सरकती रात  का, आँचल मैं थामे  बैठा हूँ ।

अंतरा-३.

ना जाने क्यूँ, दामन बचा कर, वो चल दिये..!!

राहें  उनकी, रोशन  रहें, दिल जलाए  बैठा हूँ ।

भरी   महफ़िल  में  ये, रुसवाई  थामे  बैठा  हूँ ।

सरकती  रात  का,  आँचल   मैं  थामे  बैठा हूँ ।

अंतरा-४.

क्या करुं,दिले जलन को,काश ये होता नहीं..!!

मर जाउंगा लो, आज  मैं, जाम थामे  बैठा  हूँ ।

भरी   महफ़िल  में   ये,रुसवाई  थामे  बैठा  हूँ । 

सरकती   रात  का, आँचल  मैं  थामे  बैठा हूँ ।


यारों   की   भीड़   में,   तन्हाई  थामे  बैठा  हूँ ।

सरकती  रात  का, आँचल  मैं  थामे  बैठा हूँ ।

मार्कण्ड दवे । दिनांक-१३-१०-२०११.

Friday, March 22, 2013

काश हम भी मोबाईल होते..! (गीत)


(Google Images)

काश   हम   भी   मोबाईल    होते..! (गीत)



जलते   हैं    भीतर,  काश   हम   भी   मोबाईल    होते..!

उनके   करीब  रह   कर  हम, कितने   वर्सटाईल   होते? 

(versatile=वर्सटाईल= हरफ़न मौला,सर्वगुणसंपन्न)


अंतरा-१.


जब   वो, प्यार से  अपलक  देखते, दिल के  स्क्रीन  को..!

ओ..ह, इस अदा  पर  हम, जहान से  भी  हॉस्टईल  होते..!

जलते     हैं     भीतर,  काश   हम   भी   मोबाईल    होते..!

(अपलक देखना= ताकना; Hostile= हॉस्टाईल = आक्रामक,दुश्मन )


अंतरा-२.


उनके  निपट  पास   जाकर   हम,  गालों    को   सहलाते..!

ज़ुल्फ़ों  की   ख़ुशबू  से खेल, फिर गुडी-गुडाई  फिल  होते । 

जलते      हैं     भीतर,  काश    हम   भी    मोबाईल   होते..!


(निपट=  पूरी तरह से; नाज़= गर्व) 
(Goody-Gooday feel= गुडी-गुडाई  फिल = मधुर अपनापन का 
अहसास)


अंतरा-३. 


दिनभर  नर्म  हाथों  पर  और  रात  उनके  सिरहनों  पर ।

पास  रखती  तो, अपुन  के  भी  नवाबी   ईस्टाईल  होते..!

जलते     हैं    भीतर,  काश   हम   भी   मोबाईल    होते..!

( style=ईस्टाईल= ढंग, तरीक़ा; सिरहन= तकिये  के  पास)


अंतरा-४.


दिल का  सिम जवान  रहता, प्यार का पावर ऑन  रहता ।

दुःख है मगर, काश कि हम, इश्क के  आईन्स्टाईन  होते..!

जलते     हैं   भीतर,  काश    हम    भी    मोबाईल    होते..!


(दिल का सिम= SIM CARD; आईन्स्टाईन= निष्णात संशोधक)


मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०१-०९-२०१२.


Monday, March 18, 2013

कमबख़्त मुहब्बत । (गीत)




कमबख़्त  मुहब्बत । (गीत)


http://mktvfilms.blogspot.in/2013/03/blog-post.html
कमबख़्त   मुहब्बत   जवाँ   होने  का   नाम  नहीं  लेती..!

और  एक  वो  है, जो  दिल से   कोई   काम   नहीं   लेती..!


अंतरा-१.


क्या-क्या  नहीं  करते  दिलबर, सनम को  लुभाने  को..!

एक वो  है जो,  हाले दिल  तक खुले आम  नहीं  करती..!

कमबख़्त  मुहब्बत  जवाँ   होने  का   नाम  नहीं  लेती..!

(खुले आम= अभिव्यक्त)  


अंतरा-२.


शरमा  के   यूँ   नज़रें   झुकाना, प्यार  नहीं   तो  क्या  है ?

फिर  वो  तो, नज़रों   को   ज़रा  भी   आराम   नहीं   देती..!

कमबख़्त   मुहब्बत   जवाँ   होने  का   नाम  नहीं   लेती..!


अंतरा-३.


दोस्तों, कोई   करें  भी तो  क्या  करे,  कैसे   माँगे   दिल..!

करारी    शिकस्त  पर  तंगदिल, कोई  इनाम  नहीं  देती ।

कमबख़्त   मुहब्बत   जवाँ    होने  का   नाम  नहीं  लेती..!

(तंगदिल= कंजूस)


अंतरा-४.


थका-थका सा  प्यार, बुझा-बुझा सा  इक़रार  लगता  है..!

अब  तो, सलाम के   बदले  भी, वो  सलाम  नहीं  करती..!

कमबख़्त   मुहब्बत   जवाँ   होने  का   नाम  नहीं  लेती..!


(बुझा-बुझा  सा= रूखा)


मार्कण्ड दवे । दिनांकः०८-०९-२०१२.




Friday, March 15, 2013

HINDI GEET PATHAN- CHAL RE MAN-MARKAND DAVE.



(GOOGLE)


दिल की छत पर टहल कर आते हैं..! (गीत) 



चल    रे    मन     हम,   दिल  की    छत   पर   टहल  कर   आते   हैं..!

प्यार   भरी    सोच     के,    नरम    पापोश     पहन   कर   जाते   हैं..!

( पापोश= जूते)


अंतरा-१.


आदत     है     उसे     कहीं    भी,    दबे     पाँव     धूमने   की   मगर..! 

दबे   पाँव    चल   कर    चल,   हम    उसकी   नकल   कर   आते   हैं..!

चल    रे    मन    हम,   दिल  की    छत   पर   टहल  कर   आते   हैं..!


अंतरा-२.


ओ रे  मन,  कोमल   सतह   पर,  तुम   पाँव  धरना  सँभल  कर..!

चल,  क़दमों  के  निशान  हम भी, अब  सकल   कर   आते   हैं..!

चल  रे  मन  हम, दिल  की    छत   पर   टहल  कर   आते   हैं..!


(निशान  सकल   करना= कोने-कोने में छाप छोड़ना)  


अंतरा-३.


भोलेभाले    दिल  से,   सयाने   मन   का    मुक़ाबला   ही   क्या ?

चल,   उसके   भोलेपन   का,  आज  हम  अदल   कर   आते   हैं..!

चल  रे  मन   हम, दिल  की    छत   पर   टहल  कर   आते   हैं..!


(सयाना= चालाक; अदल= इन्साफ,न्याय )


अंतरा-४.


दहशत  है,  छत  पर  कहीं,  दर्द   कि   परतें   न  जम   गई   हो..!

गर      दर्द     है     भी     तो,   एतबारी    सफ़ल   कर   आते   हैं..!

चल  रे  मन   हम,  दिल  की    छत   पर   टहल  कर   आते   हैं..!


( एतबारी  सफ़ल  करना= किसी पर  विश्वसनीयता  कायम  रखना)


मार्कण्ड दवे । दिनांकः १९-०९-२०१२.





Tuesday, December 11, 2012

MAUT KI AAHAT- HINDI GEET BY MARKAND DAVE.




मौत की आहट। (गज़लनुमा गीत)

गीतकार-स्वरांकन-संगीत-गायक-मार्कंड दवे ।

संगीत-स्वरायोजन-प्रसुन चौधरी.


हर  साँस  मे  मौत की आहट सुनाई देती  है ।
ज़िंदगी अब तो  गिन-गिन के बदला लेती है ।
१. 
ज़िंदगी   जीने  मे  जो  माहिर  माने  जाते  थे ।
उनको अब जीने की रीत देखो सिखाई जाती है ।
हर साँस मे ...................
२.
बेआबरु न हो कोई, मैं तो ख़ामोश रहता था ।
कहानी मेरी ही अब मुझ को सुनाई जाती है ।
हर साँस मे ...................

३.
मुआफ़  करना  गुस्ताख़ी  अगर  हो  कोई ।
आखरी ख़्वाहिश, सभी से तो पूछी जाती है ।
हर साँस मे ...................

मार्कड दवे ।

M.K.AUDIO-VIDEO RECORDING STUDIO.
AHMEDABAD-GUJARAT. INDIA. 






Tuesday, November 27, 2012

Innocent Shayaries by 12 Year old RAJU GUIDE.



Innocent Shayaries by 12 Year old RAJU GUIDE.






http://www.youtube.com/watch?v=9h19PFNbqlc&feature=youtu.be


अगर चाय में पत्ती नहीं तो
पीने का क्या मज़ा और
साथ में गाईड नहीं तो
घूमने का क्या मज़ा ।


चप्पल है छोटी तो
पैर में नहीं आती और
अंकल की बीवी मोटी तो
बग़ल में नहीं आती ।


अगर अत्तर की शीशी को
पत्थर से फोड़ दूँ और
जिन्सवाली मिल जाए तो
साड़ीवाली को छोड़ दूँ ।


अगर फूल को लेंगें तो
काँटा तो लगेगा और
लड़की को छेड़ेगें तो
छांटा तो उड़ेगा ।


अगर किचड़ है, पैर ड़ालोगे,
धोना तो पड़ेगा और
ड्राइवर से शादी करोगे तो
घूमना तो पड़ेगा ।


दिल्ली में घूमता तो
हेमामालिनी मिलती और
जिस की याद में घूमता हूँ
वो घरवाली नहीं मिलती ।


अगर काँच का बंगला है तो,
पत्थर कैसे मारुँ और
अमीर की बेटी है तो
आँख कैसे मारुँ ।


सिंगल बाय सिंगल वाले
नाराज़ मत होना और
अब की बार आयेंगे  तो
टू बाय टू कपल में आना ।


मेहनत  करते  हैं
एन्गल बदल-बदल के
और
उसके बाप ने पिटा
सेन्डल बदल-बदल के ।


जाम पर जाम पीने से,
क्या फायदा,
शाम को पीएगें तो,
सुबह उतर जाएगी,
और हरि नाम का प्याला पीयेंगे
तो
आखी ज़िंदगी सुधर जाएगी ।



शायर - राजू गाइड़ ।

उम्र- क़रीब १२ साल.

स्थान- अचल गढ़ - माउन्ट आबु पर्वत -राजस्थान.


मार्कण्ड दवे। (एम.के.टीवी फिल्म्स ।)

Tuesday, September 11, 2012

तुम्हारी यादें । (गीत)




A TRIBUTE TO MY GRAND SON 
LATE SHRI PARTH DAVE 
(ONLY 19 YEARS OLD)-BARODA.

MARKAND DAVE.

E-Mail: mdave42@gmail.com

SONG WRITTEN-COMPOSED & SANG BY MARKAND DAVE.



तुम्हारी यादें । (गीत)



हँसाती   है,  हमें   रूलाती   है, कहते   हैं   सब  उसे   यादें..! 
(कोरस- तुम्हारी यादें..बस  यादें!)

आती   हैं, याद  आती   हैं, सपनों में  आ के  जो  सताती  है..! 
(कोरस- तुम्हारी बातें..!)
बस  यादें..तेरी  बातें..!(२)

अंतरा-१.

निर्मल  है, बड़ा  कोमल  है, सब के  दिलों  का  दिली याराना ।
गुल  है, गुलशन  भी   है, यारी की   लगन   सही  नज़राना ।

हँसाती   है,  हमें   रूलाती   है, कहते  हैं   सब  उसे  यादें..! 
(कोरस- तुम्हारी यादें..!)
बस  यादें..तेरी  बातें..!(२)

(दिली= घनिष्ठ; लगन=  दिलचस्पी )

अंतरा-२.

मस्ती  भी,  वहाँ   बसती   है,  ख़ुद  से  दबंग  जहाँ  दोस्ती ।
रूठती,  फिर  मनाती  है,  दिल  में  कहीं   ना   ख़ुदपरस्ती । 

हँसाती   है,  हमें   रूलाती   है, कहते  हैं   सब  उसे  यादें..! 
(कोरस- तुम्हारी यादें..!)
बस  यादें..तेरी  बातें..!(२)

(दबंग= प्रभावशाली; ख़ुदपरस्ती= स्वार्थीपन)

अंतरा-३.

पाना  है, कभी  न  खोना  है, दिल  का  वही  ठिकाना  है । 
जाना   है, पहचाना  है, यारों  का   यही तो   अफ़साना  है ।

हँसाती   है,  हमें   रूलाती   है, कहते  हैं   सब  उसे  यादें..! 
(कोरस- तुम्हारी यादें..!)
बस  यादें..तेरी  बातें..!(२)

आती   हैं, याद  आती   हैं, सपनों में  आ के  जो  सताती  है..! 
(कोरस- तुम्हारी बातें..!)
बस  यादें..तेरी  बातें..!(२)

(अफ़साना= किस्सा-कहानी)

मार्कण्ड दवे । दिनांकः०६-०९-२०१२.

Thursday, July 28, 2011

SHRI RADHA-KRISHNA SONG.


M.K.TV.FILMS 

AND 

MARKAND DAVE 

AHMADABAD-
GUJARAT 

PRSENTS

SHRI RADHA-KRISHNA SONG.

"BAHIYAN PAKADO NA OHRE GIRIDHARI"

http://www.youtube.com/watch?v=bf-xe26eKYw



SINGER-KRUTI JANI.

SONG WRITER-COMPOSER-

MUSIC DIRECTOR.

MARKAND DAVE.

RECORDIST-NILESH RATHOD.

MARKAND DAVE-DATE-28-07-2011.